छत्तीसगढ़ राज्य में औद्योगिक क्षेंत्र का सकल राज्य घरेलू उत्पाद में भागीदारी का विश्लेषणात्मक अध्ययन
छतेश्वरी चौहान1, सुनीता सोनवानी2
1शोधार्थी, भूगोल विभाग, श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.), भारत।
2शोध निर्देशक, सहायक प्राध्यापक, भूगोल विभाग, श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.), भारत।
*Corresponding Author E-mail: chhaateshwarichouhan488@gmail.com
ABSTRACT:
प्रस्तुत शोध पत्र छत्तीसगढ़ राज्य में औद्योगिक क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में भागीदारी का विश्लेषणात्मक अध्ययन पर आधारित है, जिसके अंतर्गत विनिर्माण एवं औद्योगिक क्षेत्र छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। छत्तीसगढ़ अपनी प्राकुतिक सम्पदा एवं संसाधनों से परिपूर्ण है एवं यहाँ की भण्डारण क्षमता देश में अतुलनीय भूमिका निभाती है, एवं इसके तहत् इस्पात उद्योग, एल्युमिनियम, सीमेंट, बिजली उपकरण, खाद्य प्रसंस्करण तथा वस्त्र उद्योग का राज्य घरेलू उत्पाद में सहायता प्रदान करता है। राज्य में खनिजों की उपलब्धता जैसे - कोयला, लौह अयस्क, बाक्साइड, डोलोमाइट इत्यादि होने के अतिरिक्त निवेश को बढ़ावा मिलता है और आर्कषण का केन्द्र बना रहता है। छत्तीसगढ़ राज्य की आर्थिक, भौतिक एवं सामाजिक विकास को बढावा देने हेतु पर्यावरणीय सततीय विकास के लक्ष्य की अवधारणाओं का पालन किया जाय। जिससे की राज्य की विकास को सहायता मिल सके।
KEYWORDS: औद्योगिक क्षेत्र, विनिर्माण क्षेत्र, आर्थिक विकास, प्राकुतिक सम्पदा एवं संसाधन, इस्पात उद्योग, कोयला, लौह अयस्क, बाक्साइड, सामाजिक विकास, सततीय विकास इत्यादि।
1. INTRODUCTION:
छत्तीसगढ़ राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग क्षेत्र की भूमिका अतुलनीय होती है। राज्य की उद्योगो का विकास, प्रकृति, विविधता एवं राज्य के प्राकृतिक संसाधन तथा शासन द्वारा शासकीय एवं अर्द्धषासकीय योजनाओं पर आधारित होती है। उद्योगों के आधुनिकीकरण से उद्योग क्षेत्र में पूर्व की अपेक्षा वर्तमान में योगदान बढ़ा है एवं राज्य की वित्तीय भारो में सहयोग स्थापित करने में अहमियत का परिचय दिया है। आदिकाल से ही भारतीय समाज में उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। औद्योगिक संगठनों का सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त थी एवं शासन ही इनकी समस्याओं का समाधान करने में सहायता प्रदान करती थी। हमारे देश की कुल जनसंख्या का 70 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है जो कि कृषि कार्य में संलग्न है। ग्रामीण परिवेशों की अर्थव्यवस्था में जड़ता पाई जाती है क्योकि एक ओर जनसंख्या का बढ़ता भार तथा दूसरी ओर रोजगार के अवसरों में निरंतर कमी है। 19 वी. शताब्दी में अन्य विकसित देशों की भाँति भारत जैसे विकासशील देश का औद्योगिक विकास तीव्र गति से नही हो सका क्योकि एक ओर कृषि का प्रधानता और दूसरी ओर भारतीय समाज की विशेषताएँ ऐसी थी जिससे औद्योगिक विकास के मार्ग में अत्याधिक बाधाएँ उत्पन्न होने लगी जो कि विकास के मार्ग को कमजोर कर दिया परन्तु 21 वीं शताब्दी में उद्योगों का विकास आधुनिकीकरण से उत्पादन एवं हिस्सेदारी दोनों में ही तीव्र गति से धनात्मद वृद्धी होने लगी है।
2. अध्ययन के उद्देश्य:
a. छत्तीसगढ़ राज्य में उद्योगों का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान का अध्ययन करना।
b. छत्तीसगढ़ राज्य में उद्योगों का सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सेदारी का अध्ययन करना।
3. शोध परिकल्पनाएँ:
a. राज्य में उद्योगों का सकल घरेलू उत्पाद मे योगदान में वृद्धी हुई है।
b. उद्योगों का हिस्सेदारी पूर्व की अपेक्षा वर्तमान में नकारात्मक कमी आई है।
4. शोध प्रविधियाँ: प्रस्तुत शोध द्वितीयक समंको पर आधारित है जिसमें मुख्य रूप से औद्योगिक अथवा विनिर्माण क्षेत्र का राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सा, वृद्धि एवं भागीदारी को छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16, 2016-17, 2017-18, 2018-19, 2019-2020, 2020-21, 2021-22, 2022-23, 2023-24, 2024-25, 2025-26, की सहायता से आंकड़ों का सग्रहण किया है। इसके अतिरिक्त जनगणना 2011, राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन, सांख्यिकीय आर्थिक संचनालय, रायपुर (छ.ग.), राज्य के समाचार पत्र दैनिक भास्कर, नवभारत, हरिभूमि एवं शासकीय एवं अशासकीय शोध प्रकाशन की सहायता से भी द्वितीयक समंको का संग्रहण किया गया है। आंकडों का विश्लेषण औसत विधि एवं CAGR विधि द्वारा विश्लेषित कर निष्कर्ष निकाला गया है।
5. छत्तीसगढ़ राज्य में उद्योगों का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान:- राज्य के आर्थिक विकास में औद्योगिकीकरण का महत्वपूर्ण योगदान है। उद्योग द्वारा भिन्न-भिन्न प्रकार के रोजगार के अवसर देने के साथ - साथ बहुताय मात्रा में अनेक प्रकार की वस्तुएं उत्पादित करती है। छत्तीसगढ़ राज्य में स्थाई एवं सुशासन होने के अतिरिक्त गुणवत्तायुक्त निर्बाध विद्युत, असीमित वन सम्पदा, अपार खनिज सम्पदा, शांत श्रमिक स्थिति आधारभूत औद्योगिक ढाँचे की उपलब्धता होने के कारण यह निवेशको के लिए उपर्युक्त केन्द्रीकरण निर्माण होने में धनात्मक रूप से विकसित हो रही है। राज्य में कृषि आधारित उद्योगों की निर्माण एवं कृषि को बढ़ावा देते हुए बेरोजगारी की समस्या को दूर करने का भी प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण स्तर एवं क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए भी कुटीर एवं लघु उद्योगों के विकास से इन क्षेत्रों का तीव्र विकास सुनिष्चित करने का प्रयास भी किया जा रहा है।
सारिणी क्रमांक 1: उद्योगों का सकल राज्य उत्पाद में योगदान (हिस्सेदारी) (स्थिर भाव 2011-12 के अनुसार)
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क्र. |
वर्ष |
योगदान (लाख रू.) |
योगदान (प्रतिषत हिस्सेदारी) |
|
1 |
2013-14 |
3588922 |
20.80 |
|
2 |
2014-15 |
3313429 |
18.91 |
|
3 |
2015-16 |
3402519 |
18.86 |
|
4 |
2016-17 |
3168509 |
16.23 |
|
5 |
2017-18 |
3504001 |
17.51 |
|
6 |
2018-19 |
4456271 |
19.96 |
स्त्रोत: आर्थिक एवं साख्यिकीय संचनालय रायपुर (छ.ग.)
उपर्युक्त तालिका क्र. 1 में उद्योगों का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान (स्थिर भाव 2011-12) सन् 2013-14 में 3588922 लाख रू. है, जिसका हिस्सेदारी 20.80 प्रतिशत रहा परन्तु वर्ष 2014-15 में यह घटकर 3313429 लाख रू. हो गई तथा हिस्सेदारी 18.91 हो गयी थी। वर्ष 2015-16 में योगदान 3402519 लाख रू. रहा जो कि हिस्सेदारी 18.86 प्रतिशत रहा। यह भी पिछले वर्ष की तुलना में घटकर योगदान 2016-17 में 3168509 लाख रू. एवं हिस्सेदारी का 16.23 प्रतिशत हो गई, परन्तु 2017-18 में धनात्मक रूप से बढ़कर हिस्सेदारी 3504001 लाख रू. एवं 17.51 प्रतिशत वृद्धि रहा एवं 2018-19 में यह लगभग दोगुना बढ़ते हुए 4456271 लाख रू. एवं हिस्सेदारी में 19.96 प्रतिषत रहा इसकर तात्पर्य यह रहा कि उद्योगों का विकास पूर्व की अपेक्षा वर्तमान में योगदान एवं हिस्सेदारी में वृद्धि हुई है।
रेखाचित्र क्रमांक 1: उद्योगों का सकल राज्य उत्पाद में योगदान (हिस्सेदारी) (स्थिर भाव 2011-12 के अनुसार)
उपर्युक्त रेखाचित्र 1 में सकल राज्य उत्पाद में योगदान के प्रतिशत को दर्शाया गया है, जिसमें सबसे अधिक वर्ष 2013-14 में 20.8 तथा सबसे कम 16.23 वर्ष 2016-17 में दर्शाया गया है।
सारिणी क्रमांक 2: उद्योगों का सकल राज्य उत्पाद में योगदान (हिस्सेदारी) (स्थिर भाव 2011-12 के अनुसार)
|
क्र. |
वर्ष |
योगदान (लाख रू.) |
योगदान (प्रतिशत हिस्सेदारी) |
|
1 |
2019-20 |
4532028 |
19.27 |
|
2 |
2020-21 |
4814504 |
20.23 |
|
3 |
2021-22 |
5364130 |
21.28 |
|
4 |
2022-23 |
5179535 |
19.23 |
|
5 |
2023-24 |
5249859 |
18.32 |
|
6 |
2024-25 |
5571396 |
18.13 |
स्त्रोत: आर्थिक एवं साख्यिकीय संचनालय रायपुर (छ.ग.)
उपर्युक्त तालिका क्र. 2 में वर्ष 2019-20 से वर्ष 2024-25 तक उद्योगों का सकल राज्य उत्पाद में योगदान एवं योगदान के हिस्सेदारी प्रतिशत को दर्शाया गया है। वर्ष 2019-20 में उद्योगों का योगदान 4532028 लाख रूपये रहा तथा योगदान की हिस्सेदारी प्रतिशत 19.27 प्रतिशत रहा जो कि बढ़कर सन् 2020-21 में 4814504 लाख रू. हो गया जिसका हिस्सेदारी 20.23 प्रतिशत था। वर्ष 2021-22 में उद्योगों का योगदान धनात्मक रूप से 5364130 लाख रू. रहते हुए हिस्सेदारी 21.28 प्रतिशत था जो कि वर्ष 2022-23 में घटकर 5179535 लाख रू. हो गई तथा हिस्सेदारी 19.23 रही। इसका मुख्य कारण वैश्विक महामारी एवं अर्थव्यवस्था का प्रभाव धीमी हो गयी थी। वर्ष 2023-24 एवं वर्ष 2024-25 में क्रमशः योगदान एवं हिस्सेदारी का प्रतिशत 5249858 एवं 5571396 एवं हिस्सेदारी क्रमशः 18.32 व 18.13 प्रतिशत रहा। यह भी पिछले वर्ष की तुलना में
रेखाचित्र क्रमांक 2: उद्योगों का सकल राज्य उत्पाद में योगदान (हिस्सेदारी)
उपर्युक्त रेखाचित्र क्र. 2 में OX अक्ष पर वर्ष एवं OY अक्ष पर योगदान (लाख रू.) को दर्शाया गया है जिसमें स्पष्ट है कि सबसे ज्यादा योगदान वर्ष 2024-25 एवं सबसे कम वर्ष 2019-20 में दर्शित है।
सारिणी क्रमांक 3: उद्योगों का सकल राज्य घरेलू उत्पाद में योगदान तथा वृद्धि प्रतिशत (स्थिर भाव 2011-12 के अनुसार)
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क्र. |
वर्ष |
योगदान (लाख रू.) |
योगदान (प्रतिशत हिस्सेदारी) |
|
1 |
2012-13 |
1252893 |
- |
|
2 |
2013-14 |
3588922 |
34.91 |
|
3 |
2014-15 |
3313429 |
-7.68 |
|
4 |
2015-16 |
3402519 |
2.69 |
|
5 |
2016-17 |
3168509 |
-6.88 |
|
6 |
2017-18 |
3504001 |
10.59 |
|
7 |
2018-19 |
4456271 |
27.18 |
स्त्रोत: आर्थिक एवं साख्यिकीय संचनालय रायपुर (छ.ग.)
उपर्युक्त तालिका क्र. 3 में उद्योगों का सकल घरेलू राज्य उत्पाद में योगदान का प्रतिशत दर्शाया गया है जिसके अंतर्गत वर्ष 2013-14 में योगदान का प्रतिशत 34.91 प्रतिशत रहा जो वर्ष 2014-15 में ऋणात्मक रूप से वृद्धि रहा जो -7.68 प्रतिशत हो गयी। वर्ष 2015-16 में योगदान का प्रतिशत 2.69 प्रतिशत थी जो कि पुनः 2016-17 में -6.88 की कमी आयी तथा वर्ष 2017-18 में यह बढ़कर तीव्र गति से 10.59 प्रतिशत एवं वर्ष 2018-19 में यह दुगुना वृद्धि होकर 27.18 तक बनी रही।
रेखाचित्र क्रमांक 3: उद्योगों का सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वृद्धि प्रतिशत
उपर्युक्त रेखाचित्र क्र. 3 में सबसे अधिक योगदान वृद्धि प्रतिशत वर्ष 2013-14 में 34.91 प्रतिशत एवं सबसे कम वृद्धि प्रतिशत वर्ष 2014-15 में -7.68 प्रतिशत रहा।
सारिणी क्रमांक 4: उद्योगों का सकल राज्य घरेलू उत्पाद में योगदान तथा वृद्धि प्रतिशत (स्थिर भाव 2011-12 के अनुसार)
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क्र. |
वर्ष |
योगदान (लाख रू.) |
योगदान (प्रतिशत हिस्सेदारी) |
|
1 |
2018-19 |
4456271 |
- |
|
2 |
2019-20 |
4532028 |
1.70 |
|
3 |
2020-21 |
4814504 |
6.23 |
|
4 |
2021-22 |
5364130 |
11.42 |
|
5 |
2022-23 |
5179535 |
-3.44 |
|
6 |
2023-24 |
5249859 |
1.36 |
|
7 |
2024-25 |
5571396 |
6.12 |
स्त्रोत: आर्थिक एवं साख्यिकीय संचनालय रायपुर (छ.ग.)
उपर्युक्त तालिका क्र. 4 में स्पष्ट है कि उद्योगों का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान तथा वृद्धि प्रतिशत को स्थिर भाव वर्ष 2011-12 के आधार पर प्रदर्शित है कि 2019-20 में वृद्धि प्रतिशत 1.70 प्रतिशत रहा जो कि बढ़कर वर्ष 2020-21 में यह भारी वृद्धि के साथ 6.23 प्रतिशत हो गई। वर्ष 2021-22 में उद्योगों की हिस्सेदारी वृद्धि प्रतिशत 11.42 प्रतिशत रहा जो कि सर्वोच्च है इसका मुख्य कारण अर्थव्यवस्था में पूर्व की अपेक्षा तेजी आई थी जो कि 2022-23 में यह ऋणात्मक रूप से -3.44 वृद्धि प्रतिशत हो गई तथा वर्ष 2023-24 मं धनात्मक वृद्धि करते हुए 1.36 प्रतिशत हो गई एवं वर्ष 2024725 मं हिस्सेदारी वृद्धि प्रतिशत 6.12 प्रतिशत रहा है।
रेखाचित्र क्रमांक 4: उद्योगों का सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वृद्धि प्रतिशत
उपर्युक्त रेखाचित्र क्र. 4: में स्पष्ट ळे कि उद्योगों का राज्य सकल घरेलू उत्पाद की योगदान वृद्धि प्रतिशत सबसे अधिक वर्ष 2021-22 एवं सबसे कम वृद्धि प्रतिषत - 3.44 प्रतिषत रहा है।
8. निष्कर्ष:-
निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ राज्य में उद्योग क्षेत्रों का राज्य के विकास में हिस्सेदारी बहुत ही ज्यादा मात्रा में अपनी सहयोग प्रदान कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य अपने प्रकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है, यहाँ की खनिज संसाधन, वन संसाधन, जल संसाधन, विद्युत संसाधन इसके अतिरिक्त यहाँ की उद्योग संसाधन भी अपने आप में एक वर्चस्व स्थापित करती है। छत्तीसगढ़ राज्य की समस्याएँ मुख्य रूप से दो कारणो पर निर्भर करती है। पहला तो यहाँ के श्रमिक वर्ग की आर्थिक कारण जैसे - झगड़े, मजदूरी दर, महंगाई भत्ता, बोनस कार्य के घण्टे, कार्य के घण्टे, कार्य की दशाएँ, सवेतन, बिना वेतन की छुट्टीयाँ आदि के कारण उत्पन्न होती है। गैर आर्थिक कारण मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, भौगोलिक तथा राजनैतिक होते है जो कि औद्योगिक उत्पादन को प्रभावित करते है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में राज्य की योगदान उद्योगों के रूप में वृद्धि हुए है जो कि सकारात्मक पाया गया। अतः स्पष्ट है कि शुन्य परिकल्पना अस्वीकार होगी। इस प्रकार से यह भी कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ राज्य में उद्योंगों की हिस्सेदारी में वृद्धि इुई है जो पूर्ण रूप से सत्य है, अतः स्पष्ट है कि हिस्सेदारी की नकारात्मक स्वरूप शून्य परिकल्पना परीक्षण करने पर सही नही पाया गया निष्कर्षतः शून्य परिकल्पना अस्वीकार होगी एवं वैकल्पिक परिकल्पना स्वीकार होगी। छत्तीसगढ़ राज्य की भौगोलिक परिपेक्ष्य में मजबूती आयी है यहाँ की उत्पादित वस्तुओं एवं सहायता देश की विकाय कार्य में योगदान दे रही है तथा यहाँ की उद्योग राज्य की सर्वागीण विकास को भी एक मूर्त रूप प्रदान कर रही है।
9. संदर्भ सूची:
1. Banga, T.R. Sharma] (1982) “Industrial organization and engineering economics, Khanna Publishers delhi, P.P. 32-36
2. Chhattishgarh sandarbh, (2014)” Jansampark Sanchalnalya Chhattishgarh” Raipur
3. Dhar P.K. (2015) “Indian Bussiness Environment,” kalyani publishes, Ludhiyana.
4. Gadgi; D R. (2007) “The Industrial evalution of India in Recent times, Lighting sources Inc, P.P. 12-18
5. Govt. of India, (1998), Report of High-Power Committee on Industry. P.P. 34-36.
6. Karche R.M. (1989), “Sugar Coopratives in Developing Economy” Parimal Prakashan, August 1989, P.P. 26-31
7. www.cg.gov.in
8. www.ugd.cg.in
9. www.cg.statistical organization.gov.in
10. आर्थिक, सांख्यकीय संचलनालय रायपुर (छ.ग.)
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Received on 26.09.2025 Revised on 18.10.2025 Accepted on 04.11.2025 Published on 14.11.2025 Available online from November 25, 2025 Int. J. of Reviews and Res. in Social Sci. 2025; 13(4):247-251. DOI: 10.52711/2454-2687.2025.00037 ©A and V Publications All right reserved
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